द रियल इनसाइट इंडिया | विशेष खोजी रिपोर्ट
उज्जैन। मक्सी रोड स्थित उद्योगपुरी, जिसे प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में विकसित किया गया था, अब अपने मूल उद्देश्य से भटकता हुआ दिखाई देने के दावे सामने आ रहे हैं। क्षेत्र से प्राप्त जानकारी और स्थानीय स्तर पर की गई पड़ताल के आधार पर दावा किया जा रहा है कि लगभग 20 प्रतिशत औद्योगिक भूखंडों पर मूल आवंटी स्वयं उद्योग संचालित नहीं कर रहे, बल्कि उन्हें अन्य लोगों को किराये पर देकर व्यवसाय संचालित कराया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार जिन भूखंडों का आवंटन औद्योगिक इकाइयों की स्थापना, उत्पादन बढ़ाने और स्थानीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था, उनमें से कई स्थानों पर वर्तमान में प्लास्टिक सामग्री, बेकरी, फर्नीचर निर्माण, डीजे बॉक्स निर्माण एवं मरम्मत, कबाड़ तथा अन्य लघु व्यवसाय संचालित किए जा रहे हैं। दावा यह भी किया जा रहा है कि कुछ प्रभावशाली आवंटियों ने सरकारी औद्योगिक भूमि को स्वयं उपयोग में लेने के बजाय उसे किराये की आय का माध्यम बना लिया है।
यदि यह स्थिति वास्तविक रिकॉर्ड में भी पाई जाती है, तो यह औद्योगिक क्षेत्र के मूल उद्देश्य पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। औद्योगिक भूखंडों का आवंटन केवल भूमि उपलब्ध कराने के लिए नहीं किया जाता, बल्कि राज्य में उद्योगों की स्थापना, उत्पादन क्षमता बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और रोजगार सृजन के लिए किया जाता है। ऐसे में यदि भूखंडों का उपयोग लीज़ की शर्तों के विपरीत या बिना आवश्यक अनुमति के अन्य लोगों द्वारा किया जा रहा है, तो इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
सूत्रों का कहना है कि कई छोटे व्यापारी वर्षों से इन भूखंडों पर किराये के आधार पर अपना व्यवसाय चला रहे हैं, जबकि मूल आवंटी केवल किराया प्राप्त कर रहे हैं। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो इससे यह प्रश्न भी उठता है कि संबंधित विभाग द्वारा नियमित निरीक्षण, उपयोग की समीक्षा और लीज़ शर्तों के पालन की निगरानी किस स्तर तक की जा रही है।
मक्सी रोड उद्योगपुरी उज्जैन के औद्योगिक विकास का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। ऐसे में औद्योगिक भूखंडों के वास्तविक उपयोग की पारदर्शी जांच न केवल औद्योगिक नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक है, बल्कि उन नए उद्यमियों के हित में भी है जो उद्योग स्थापित करने के लिए वर्षों से भूखंड की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
द रियल इनसाइट इंडिया इस पूरे मामले की दस्तावेज़ी पड़ताल कर रहा है। आगामी रिपोर्टों में आवंटन रिकॉर्ड, लीज़ शर्तों, निरीक्षण रिपोर्टों तथा संबंधित विभाग के आधिकारिक पक्ष के आधार पर विस्तृत तथ्य प्रकाशित किए जाएंगे।
नोट: इस रिपोर्ट में “लगभग 20 प्रतिशत भूखंड किराये पर संचालित होने” का उल्लेख क्षेत्र से प्राप्त जानकारी पर आधारित है। इसका अंतिम सत्यापन संबंधित विभागीय अभिलेखों और जांच के आधार पर ही किया जा सकेगा।