विशेष इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट | द रियल इनसाइट INDIA | उज्जैन
धार्मिक नगरी उज्जैन के स्वास्थ्य विभाग में सरकारी खजाने की खुली लूट और गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का सनसनीखेज मामला सामने आया है। ‘द रियल इनसाइट इंडिया’ (THE REAL INSIGHT INDIA) की विशेष पड़ताल में यह बड़ा खुलासा हुआ है कि जिले के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में आउटसोर्स कर्मचारियों की तैनाती से लेकर दवाओं व मेडिकल उपकरणों के क्रय-विक्रय तक में नियमों को ताक पर रखकर बड़ा फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। फर्जी उपस्थिति के जरिए सरकारी बजट ठिकाने लगाने और सच दबाने के लिए आउटसोर्स ठेका एजेंसियों द्वारा जिम्मेदार अधिकारियों तक हर महीने कमीशन के लिफाफे पहुँचाए जा रहे हैं।
‘द रियल इनसाइट इंडिया’ की गहन पड़ताल में सामने आया है कि उज्जैन जिले के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों की मस्टर रोल व बायोमेट्रिक सूचियों में ऐसे दर्जनों आउटसोर्स कर्मचारियों के नाम दर्ज हैं, जो धरातल पर कभी ड्यूटी पर आते ही नहीं। कागज़ों में इन फर्जी कर्मचारियों की हाजिरी दिखाकर हर महीने लाखों रुपये का वेतन आहरित किया जा रहा है। इस कागज़ी खेल को दबाए रखने और विभागीय मिलीभगत बनाए रखने के लिए आउटसोर्सिंग का ठेका लेने वाली निजी कंपनियां विभाग के अधिकारियों व प्रभारियों को हर महीने एक निश्चित राशि के लिफाफे बांट रही हैं।
विभागीय सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, सामग्री क्रय-विक्रय के नाम पर सबसे बड़ा खेल फर्नीचर खरीदी और अस्पतालों व विभागीय भवनों के मेंटेनेंस (रखरखाव) के बजट में किया जा रहा है। सूत्रों का दावा है कि अस्पतालों के लिए आवश्यक फर्नीचर की खरीदी में बाज़ार दरों से कहीं अधिक दामों पर बिल तैयार किए जा रहे हैं, जबकि धरातल पर घटिया गुणवत्ता का सामान सप्लाई किया जा रहा है। इसी प्रकार भवनों और उपकरणों के मेंटेनेंस के नाम पर केवल कागज़ों में मरम्मत कार्य दर्शाकर लाखों रुपये के फर्जी बिल पास कराए जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि फर्नीचर खरीदी और मेंटेनेंस के इस पूरे खेल में अधिकारियों का तय प्रतिशत कमीशन पहले से ही फिक्स रहता है, जिससे हर साल सरकारी बजट का बड़ा हिस्सा सीधे अफसरों की जेब में जा रहा है।
‘द रियल इनसाइट इंडिया’ की इस विशेष रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला पहलू स्वास्थ्य विभाग में ही पदस्थ एक उच्चाधिकारी की अकूत बेनामी संपत्ति से जुड़ा सामने आया है। सामग्री खरीदी, मेंटेनेंस और आउटसोर्स सिंडिकेट के गठजोड़ के दम पर इस अधिकारी ने अपनी आय के वैध स्रोतों से कई गुना अधिक संपत्ति का साम्राज्य खड़ा कर लिया है। पड़ताल के अनुसार उक्त अधिकारी ने जिला धार में करोड़ों रुपये की लागत से भव्य व आलीशान आवासीय बंगला बनवा रखा है, वहीं मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के प्राइम क्षेत्रों में भी कई अचल संपत्तियां हासिल की हैं।
इसके अलावा उक्त अधिकारी के पास लक्जरी गाड़ियों का एक बड़ा काफिला मौजूद है, जिसमें महिंद्रा की SUV 700, टाटा की पंच और महिंद्रा की एक अन्य लक्जरी कार समेत कुल 3-3 चार पहिया वाहन शामिल हैं। इतना ही नहीं, अपने बच्चों के विवाह समारोहों में भी इस अधिकारी द्वारा बेहिसाब नकदी खर्च की गई, जिसमें लाखों रुपये के सोने-चांदी के आभूषणों की खरीदारी और शाही आयोजनों का खर्च साफ तौर पर दिखावा बना। इसके अलावा भी कई अन्य संपत्तियों के तार इस अधिकारी के काले साम्राज्य से जुड़ रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग में जारी इस ‘लिफाफा कल्चर’ और भ्रष्टाचार को लेकर ‘द रियल इनसाइट इंडिया’ के इस खुलासे के बाद समूचे प्रशासनिक महकमे में भारी हड़कंप मच गया है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद अब उज्जैन जिले में तैनात सभी आउटसोर्स कर्मचारियों के तत्काल निष्पक्ष भौतिक सत्यापन और दोषी अधिकारियों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की मांग जोर पकड़ने लगी है। ‘द रियल इनसाइट इंडिया’ इस पूरे मामले और आगामी प्रशासनिक हलचलों पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा।
