मंदसौर। कृषि उपज मंडी समिति पिपलिया मंडी एवं उससे संबद्ध उप मंडियों में कराए गए निर्माण एवं रखरखाव कार्यों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त दस्तावेजों की पड़ताल के बाद हमारी टीम ने एक स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञ (इंजीनियर) को साथ लेकर मंडी परिसर और उप मंडी क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जो तथ्य सामने आए, उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और भुगतान प्रक्रिया पर कई प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों में बाउंड्री वॉल, टिन शेड, विद्युत कार्य एवं विभिन्न मेंटेनेंस कार्यों को नियमानुसार पूर्ण बताया गया है। संबंधित कार्यों के बिल, वाउचर और भुगतान संबंधी दस्तावेज भी उपलब्ध हैं। लेकिन जब हमारी टीम ने इंजीनियर के साथ मौके पर पहुंचकर इन कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया तो कई स्थानों पर दस्तावेजों और वास्तविक स्थिति में स्पष्ट अंतर दिखाई दिया।
तकनीकी निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कई निर्माण कार्यों में गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं दिखाई दी। वहीं कुछ ऐसे मेंटेनेंस कार्य भी सामने आए जिनके बिल और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड तो उपलब्ध हैं, लेकिन मौके पर उन कार्यों के होने के पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले। निरीक्षण में यह भी सामने आया कि कुछ कार्यों में उपयोग की गई सामग्री और निष्पादित कार्य की गुणवत्ता दस्तावेजों में दर्शाए गए विवरण से मेल नहीं खाती।
मामले को और गंभीर बनाता है कि इन कार्यों की तकनीकी स्वीकृति और भुगतान की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद जमीनी स्तर पर कई खामियां दिखाई दे रही हैं। इससे सरकारी राशि के उपयोग और कार्यों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों और व्यापारिक वर्ग में चर्चा है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए। यदि स्वतंत्र जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों, तकनीकी अमले और ठेकेदारों की जवाबदेही तय होना आवश्यक होगी।
बताया जा रहा है कि मंडी में पदस्थ इंजीनियर और निर्माण कार्यों से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित विभाग इन आरोपों की जांच कर क्या कार्रवाई करता है।