
भारत सरकार द्वारा संचालित जनगणना कार्य इन दिनों उज्जैन जिले में लगातार जारी है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में शासकीय विभागों के कर्मचारियों को घर-घर जाकर सर्वे और जानकारी संकलन की जिम्मेदारी दी गई है। यह कार्य प्रशासनिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसी के आधार पर भविष्य की कई योजनाओं और व्यवस्थाओं का निर्धारण किया जाता है।
मैदानी स्तर पर कार्य कर रहे कर्मचारियों के बीच कार्य वितरण को लेकर असंतोष की स्थिति देखने को मिल रही है। जानकारी के अनुसार कुछ कर्मचारियों को लगभग 50 से 60 मकानों की जनगणना का कार्य दिया गया है, जबकि कई कर्मचारियों को 200 से 400 तक मकानों का सर्वे करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ऐसे में अधिक मकानों का दायित्व संभालने वाले कर्मचारियों को अतिरिक्त समय और मेहनत लगानी पड़ रही है।
जनगणना कार्य में लगे कर्मचारियों में ऐसे कर्मचारी भी शामिल हैं जो स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। बताया जा रहा है कि लगभग 20 प्रतिशत कर्मचारी किसी न किसी बीमारी या शारीरिक परेशानी के बावजूद अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। लगातार फील्ड में रहकर सर्वे कार्य करना और निर्धारित समय सीमा में कार्य पूर्ण करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।
कर्मचारियों के बीच यह मांग भी सामने आ रही है कि जनगणना कार्य का वितरण अधिक संतुलित तरीके से किया जाए, ताकि सभी कर्मचारियों पर समान रूप से कार्यभार रहे। सभी कर्मचारियों को बराबर कार्य सौंपे जाने से जनगणना प्रक्रिया और अधिक व्यवस्थित, सुचारु एवं प्रभावी तरीके से पूरी हो सकती है।
जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में प्रशासन और कर्मचारियों के बीच बेहतर समन्वय को आवश्यक माना जा रहा है। वर्तमान में सभी कर्मचारी शासन के निर्देशानुसार अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं और जिले में जनगणना कार्य निरंतर जारी है।




